Ganit shikshan ka mahatva | Dainik jeevan me ganit ka mahatva

हेलो दोस्तों,

आप सभी का हमारे वेबसाइट में स्वागत है। आज के पोस्ट में मैं आपको गणित शिक्षण का महत्व और दैनिक जीवन में गणित विषय के महत्त्व को बताने वाली हूं।

Ganit shikshan ka mahatva 

 गणित शिक्षण का हमारे दैनिक जीवन में बहुत महत्व है। गणित सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक संदर्भ एवं अन्य सभी पहलुओं में मौजूद है।



 गणित सैद्धांतिक पक्ष और व्यवहारिक पक्ष दोनों में शामिल होता है। गणित हमारे दैनिक जीवन में आने वाली समस्याओं को हल करने में मदद करता है और गणित सभी विषयों को समझने में मदद करता है।

  गणित सिर्फ गणित विषय का ही प्रश्न हल नहीं करता बल्कि यह सभी विषयों को समझने में मदद करता है। 


राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2005 के अनुसार बच्चो को गणित की शिक्षा बाहरी जीवन से जोड़कर देना है ताकि बच्चे सिर्फ सिद्धांत और पाठ्यक्रम के प्रश्नों को हल ना करें बल्कि बाह्य जगत से अंत:क्रिया करते समय जो समस्या आती है उसे भी हल कर सके।


 राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2005 के अनुसार बच्चे में तार्किक क्षमता को विकसित करना है। जैसे अगर बच्चे को जोड़ सिखाना है तो शिक्षक का दायित्व सिर्फ किताब में दिए गए प्रश्नों को हल करवाने से नहीं है बल्कि जब बच्चे बाहर जाते हैं और छोटी-छोटी सामान लाते हैं वहां बच्चा ठीक से जोड़ पाते है या नहीं यह महत्वपूर्ण है। 


शिक्षक का दायित्व है कि बच्चों को कोई भी विषय किताब से जोड़कर नहीं सिखाना हैै बल्कि दैनिक जीवन से जोड़कर सिखाना है।


दैनिक जीवन परिस्थितियों में गणित

खेल की घंटी के दौरान हम देखते हैं कि जब बच्चे खेल के मैदान में फुटबॉल खेलते हैं तो फुटबॉल के कप्तान अपने टीम के सभी खिलाड़ियों को एक निश्चित क्रम में खड़ा रहने के लिए कहते हैं। जैसे 5+3 +2 या 4 +3 +3। इस प्रकार हम देखते हैं कि क्षेत्ररक्षण के लिए कप्तान की सूझबूझ और तार्किक सोच गणित की ओर इशारा करती है। 


जब बच्चे क्रिकेट खेलते हैं तो कप्तान अपने टीम के सभी खिलाड़ियों को खास जगह पर रहने के लिए कहते हैं इसमें भी सही निर्णय लेने की आवश्यकता होती है। कप्तान को खेल और इसके साथ ही स्थान की सही जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है। इ


इसी प्रकार कबड्डी व खो-खो में भी खिलाड़ियों को सही स्थान की समझ होना अत्यंत आवश्यक है। 


इसी प्रकार जब किसान खेती करते है तो वह अपनी जमीन के क्षेत्रफल को ध्यान में रखते हुए बीज की मात्रा, खाद, पानी, कीटनाशक की मात्रा, मजदूरों की संख्या और कृषि की लागत का भी अनुमान लगाते है और इस पूरी प्रक्रिया में गणित शामिल होता है। 


जब बच्चे विज्ञान को पढ़ते हैं और उन्हें एक पौधा रोपने के लिए कहा जाता है तो वह प्रथम दिन बीज होते हैं और थोड़ा पानी छिड़क देते हैं और बाद में दूसरे दिन से वह प्रतिदिन अवलोकन करते रहते और मापते रहते हैं कि पौधे में कितने सेंटीमीटर के बढ़ोतरी हुई है और पौधे को किस किस चीज की आवश्यकता है और पौधों के बढ़ने की सही लंबाई क्या होनी चाहिए? 


इसमें गणित की समझ में अत्यंत आवश्यक है। यह प्रक्रिया मापन, अवलोकन से संबंधित है।


 उपर्युक्त उदाहरणों में हमने देखा कि गणित सिर्फ कक्षा तक ही सीमित नहीं है बल्कि हमारे परिवेश से जुड़ा हुआ है। 


गणित हमारे सभी कार्यों में शामिल है। गणित के द्वारा सभी विषयों का समाकलन किया जाता है। अतः ऐसा कोई कोई भी क्षेत्र नहीं है जहां गणित मौजूद नहीं है।

संख्याओं, गणितीय आकृति, सिद्धांत व सूत्रों प्रक्रिया के अलावा भी गणित सभी क्षेत्रों में प्रस्तुतीकरण संप्रेषण और सटीकता से प्रभावित करता है।


 गणित और साहित्य


बहुत सारे लोग साहित्य और गणित को एकदम अलग मानते हैं। उनका कहना है कि साहित्य में गणित नहीं है। गणित का संबंध सटीकता और तर्क से है लेकिन साहित्य का संबंध भावना, एहसास से है और गणित भावना एहसास से बिल्कुल अलग है।


 परंतु सच्चाई इसके ठीक विपरीत है। विलियम शेक्सपियर का कहना है कि व्यक्ति की अभिव्यक्ति ऐसी होनी चाहिए जिससे कि वह कम शब्दों में सटीकता के साथ अधिक अभिव्यक्त कर सके।


 अर्थात संक्षिप्त वाक्यों में अपनी बेहतरीन प्रस्तुति देने वाले को ही बुद्धिमान कहा जाता है। इस प्रकार हमने देखा कि गणित साहित्य से जुड़ा हुआ है। 


प्राथमिक स्तर पर बच्चों को अपने विचारों को अभिव्यक्त करने के लिए स्वतंत्रता प्रदान की जाती है और प्राथमिक स्तर की समाप्ति तक उनके पास लगभग 5000 शब्दों के भंडार हो जाते हैं।


 परंतु उच्च प्राथमिक स्तर पर बच्चों को एक निश्चित शब्द सीमाओं के अंदर बांधकर अभिव्यक्त करने के लिए कहा जाता है ताकि बच्चे कम शब्दों में ही सटीकता के साथ अर्थ पूर्ण वाक्य द्वारा अपने विचार को प्रस्तुत कर सके। 


इन्हीं शब्द सीमा के अंदर जिस बच्चे का सटीक उत्तर प्राप्त हो जाता है वही बच्चा बुद्धिमान कहलाता है। 

आत: हमें उनको सटीक और व्यापक रूप से अभिव्यक्त करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।


कविता लिखते समय पंक्तियों की लंबाई और व्यवस्थित कर्म को विशेष रूप से ध्यान में रखा जाता है। कविता लय, भाव, व्यवस्थित क्रम व अर्थपूर्ण पंक्तियों पर निर्भर रहता है। इन सभी में गणित छुप कर बैठा रहता है और साहित्य के भाव व संरचना को नियंत्रण में रखता है।


गणित और विज्ञान :- 

 गणित और विज्ञान का बहुत गहरा संबंध है। विज्ञान की ऐसी कोई भी शाखा नहीं है जहां गणित न हो।


 जैसे भौतिक विज्ञान में देखा जाए तो ज्यादातर अवधारणाएं, अवलोकन प्रयोग पर आधारित होते हैं और गणित के द्वारा इसकी व्याख्या की जाती है।


 यह एक वैज्ञानिक तथ्य है जिसमें गणित शामिल है। Physics के सभी क्षेत्रों में गणित शामिल है। जैसे प्रकाश, ध्वनि, रासायनिक क्रियाओं की व्याख्या करना इत्यादि क्षेत्रों में गणित मौजूद होता है।


 मनुष्य का शारीरिक विकास, मस्तिष्क का वजन, रक्त दाब का मापन, हृदय की धड़कन, जानवरों और पशुओं के विकास की गति इत्यादि में भी गणित शामिल होता है। विज्ञान के सभी क्षेत्रों में गणित मौजूद है। विज्ञान की शायद ही ऐसी कोई शाखा होगी जहां गणित नहीं है।


गणित और पर्यावरण अध्ययन

प्राथमिक कक्षा के पर्यावरण अध्ययन के पाठ्यक्रम में वातावरण से संबंधित कई सारे आंकड़े इकट्ठे करने के लिए दिए गए हैं।


 जैसे विद्यालय, परीक्षा, बगीचा इत्यादि बनाने की प्रक्रिया में क्षेत्रफल, लंबाई, मापन, अनुपात की अवधारणा की आवश्यकता होती है। 


संतुलित और पौष्टिक आहार देने के लिए खाद्य पदार्थ को सभी बच्चों के शारीरिक संरचना को ध्यान में रखते हुए अनुमान लगाया जाता है।


 जैसे कुपोषण के शिकार बच्चों को ज्यादा प्रोटीन, वसा, विटामिन, कार्बोहाइड्रेट वाला भोजन दिया जाता है तथा मोटापे से ग्रसित बच्चे को कम वसा कम कार्बोहाइड्रेट वाला भोजन दिया जाता है।


गणित और भूगोल ( Geography ) 

जिस प्रकार गणित को विज्ञान से अलग नहीं किया जा सकता है। ठीक उसी प्रकार भूगोल को गणित से अलग नहीं किया जा सकता है।


 किसी भी जगह के बारे में जब हम पढ़ते हैं और वहां का तापमान, आद्रता और वर्षा अर्थात वहां के वातावरण के बारे में जानते हैं जिसमें गणित मौजूद होता है।

गणित के त्रिकोणमिति के द्वारा हम पर्वत की ऊंचाई का पता लगा सकते हैं।


गणित और इतिहास :-


गणित इतिहास में छाया हुआ है। इतिहास में बहुत सारे घटनाओं के चक्रों में समय बताया गया है और कुछ कुछ घटनाओं के बीच समय का अनुमान लगाने के लिए छोड़ा गया है। जिससे कि बच्चों में तार्किक क्षमता का विकास हो सके।


 इतिहास में जहां भी कोई घटना घटती है उसे दिखाने के लिए मानचित्र का प्रयोग किया गया है जो गणित से संबंधित है।


गणित और कला शिक्षण


गणित दृश्यकला, संगितकला, नाट्यकला, इत्यादि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जैसे मूर्तिकार कोई भी मूर्ति बनाते हैं तो सिर, आंख, नाक, हाथ, पैर एक निश्चित अनुपात में निर्धारण करके बनाते हैं।  

अगर मूर्तिकार इसका ध्यान नहीं रखेंगे तो उनके द्वारा बनाए गए मूर्ति की सुंदरता ही समाप्त हो जाएगी। इस प्रकार हम देखते हैं कि कला शिक्षण भी गणित का ही खेल है।


तो दोस्तों, आज के पोस्ट में मैंने आपको बताया कि गणित शिक्षण का क्या महत्व है और दैनिक जीवन में गणित सभी विषय से कैसे संबंधित है? अगर आपको यह पोस्ट अच्छा लगा वह तो अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करें।

 धन्यवाद!

Post a Comment

0 Comments