Kya hmari sabhi kriyaaon me ganit shamil hai ? Kaise | गणित हमारे चारों ओर है कैसे?

 हैलो दोस्तों, 

आप सभी का हमारे वेबसाइट Rasoteach में स्वागत है। आज के पोस्ट में मैं आपको बताने वाली हूं कि गणित किस प्रकार हमारे सभी क्रियाओं में शामिल है?


Kya hmari sabhi kriyaaon me ganit shamil hai ? Kaise | गणित हमारे चारों ओर है कैसे?


जी हां दोस्तों, हमारी सभी क्रियाओं में गणित शामिल है। सुबह उठने से लेकर रात्रि में सोने तक होने वाली सभी क्रियाओं में गणित शामिल होता है। हम सभी लोग सुबह उठकर समय देखते हैं तो कहते हैं 6:00 बज रहा है। यहां 6 गणित है।


 जब हम रसोईघर में चाय बनाने जाते हैं तो मात्रा के अनुसार ही दूध, पानी, चायपत्ती, चीनी डालते हैं। जैसे हमें दो कप चाय बनाना होता है तो हम 1½ कप दूध, ½ का कप पानी डालते हैं तत्पश्चात एक चम्मच चाय पत्ती और दो चम्मच चीनी डालते हैं। इस प्रक्रिया में भी गणित शामिल है। 



बच्चे को इस प्रकार से भी समझा सकते हैं:- हम बच्चों से पूछेंगे कि आप कितने बजे स्कूल आते हैं तो बच्चे इसका जवाब जवाब देंगे 10,... तो उनसे पूछेंगे 10 क्या है?


 तो बच्चे का जवाब होगा गणित। इसमें भी गणित शामिल है।


 बच्चों से पूछेंगे कि आप कितनी रोटियां खाते हैं और लंच में कितनी रोटियां लाए हैं तो इसका जवाब देने समय भी बच्चों को एहसास होगा कि इसमें भी गणित शामिल है।


 जब हम कॉपी या किताब लेने जाते हैं तो कहते हैं कि 8 कॉपियां दे दीजिए। दुकानदार हमें दे देता है इस प्रकार हम देखते हैं कि इसमें भी गणित शामिल है।


 रोटी की आकृति कैसी होती है उसके जवाब में भी गणित छिपा हुआ है। 


हम सभी बच्चों के पेंसिल को मिलाकर भी बच्चों से सवाल जवाब के माध्यम से उनके आसपास गणित के होने का एहसास दिला सकते हैं।


 हम जब भी कोई सामान लेने दुकानदार के पास जाते हैं तो वस्तु के वजन में गणित तो होता ही है इसके साथ ही साथ वस्तु के बदले में जो पैसे देते हैं उसमें भी गणित शामिल होता है।


 हम जब कोई सूट का कपड़ा लेने जाते हैं और कहते हैं कि 4 मीटर कपड़ा दीजिए। इसमें भी गणित छिपा हुआ है। हम किसी भी विषय को पढ़ते - पढ़ाते समय गणित के से मुखातिब जरूर होते हैं।


 हम कहीं भी घूमने जाते हैं तो उसका दूरी हमें जरूर पता होता है इसमें भी हम देखते हैं कि गणित का उपयोग यहां भी हो रहा है।


 रितिका को अपना घर सजाना था और वह अपने घर में सामान तो रखना चाहती थी साथ ही अपने घर को खुला - खुला भी रखना चाहती थी। उसे एक अलमारी रखना था जो कि उसे समझ में नहीं आ रहा था कि अलमारी को घर के अंदर कैसे ले जाएं सीधा करके ले जाए या आड़ा - तिरछा करके ले जाए।


 पलंग पर कौन सी चादर पूरी तरह ढक सकती है और फर्श तक पहुंचती भी नहीं। इसमें गणित का स्थानिक समझ छिपा हुआ है।


हम जब रोटी बनाने के लिए आटा गूंदते हैं तो उसमें मात्रा के अनुसार ही पानी डालना होता हैं। 


जैसे 1 किलो आटा में दो गिलास पानी की आवश्यकता होती है। अगर हम दो की जगह तीन गिलास डाल दे तो रोटी बन ही नहीं पाएगा।


इस प्रक्रिया में भी गणित ही शामिल है। यहां तक कि हम पानी भी पीते हैं तो कहते एक ग्लास पानी दीजिए उसमें भी गणित शामिल होता है।

 

अगर एक बार हम गणित को अपने आसपास ढूंढना शुरू करें तो इसका कोई अंत ही नहीं होगा।


 ऐसा कोई क्रिया ही नहीं है जिसमें गणित शामिल ना हो।  गणित को हम कभी देख नहीं पाते हैं। यह एक अमूर्त विषय है। परंतु फिर भी हम गणित को हर जगह पाते हैं। चाहे वह संख्या के रूप में हो या प्रतीक के रूप में या प्रति चित्रण के रूप में इत्यादि।


 यहां तक की माचिस के डिब्बे के आकार, उसके सतहों की संख्या और तिल्लियां में भी गणित शामिल होता है।


 गणित हमें विज्ञान, इतिहास, हिंदी, संस्कृत, अंग्रेजी सभी विषय में देखने को मिलता है।


 सबसे ज्यादा लोग गणित से दैनिक जीवन में रूबरू होते हैं।जब नया मकान बनाया जाता है तो खिड़की और दरवाजे के आकार, लंबाई, चौड़ाई में भी गणित ही शामिल होता है।


उपर्युक्त उदाहरणों में हमने देखा की गणित हमारी सभी क्रियाओं में शामिल है तथा बच्चे को इन उदाहरणों के माध्यम से और प्रयोग करवा कर हम बच्चों को गणित से रूबरू करवा सकते हैं। 


इस माध्यम से बच्चों के मन और मस्तिष्क में गणित की समझ और संकल्पनाओं को विकसित कर सकते हैं। इसमें बच्चे थोड़ा सा भी उबाऊ महसूस नहीं करेंगे और रूचिपूर्ण तरीके से गणित को सीखेंगे।


तो दोस्तों, आज के पोस्ट में मैंने आपको बताया कि गणित हमारी सभी क्रियाओं में कैसे शामिल है? तो दोस्तों आपको यह पोस्ट कैसा लगा हमें कमेंट करके जरूर बताएं अगर आपको यह पोस्ट पसंद आया हो तो अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करें।

धन्यवाद। 


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