Satat aur vyapak mulyankan kya hai?

 सतत और व्यापक मूल्यांकन क्या है? अपने शब्दों में स्पष्ट करें।

सतत और व्यापक मूल्यांकन Continuous and Comprehensive Evaluation का हिंदी रूपांतरण है जिसमें सतत का अर्थ है हमेशा यानी लगातार


 इसे संक्षेप में सीसीई (CCE) के नाम से जाना जाता है। यह प्रक्रिया बच्चों के विद्यालय में प्रथम दिन कदम रखते ही शुरू हो जाता है।


अतः यह एक निरंतर चलने वाला प्रक्रिया है यानी कि इस प्रक्रिया में बच्चों का मूल्यांकन प्रत्येक त्रिमाही/ छमाही अथवा वार्षिक परीक्षा के द्वारा ना करके प्रतिदिन करना है।


इसका तात्पर्य है कि कक्षा में शिक्षक अथवा बच्चों द्वारा शिक्षा ग्रहण करने के दौरान भी बीच-बीच में बच्चों से प्रश्न पूछना है।


उन्हें वर्ग में किसी विषय को शुरू करने से पहले पूर्व ज्ञान से जरूर जोड़े ताकि बच्चों के वास्तविक स्थिति का पता चल सके। 


 सतत और व्यापक मूल्यांकन यानी कि सीसीई पैटर्न लाने से बच्चों में शिक्षा के स्तर में काफी काफी बढ़ोतरी हुई है।


 पहले बच्चे प्रतिदिन विद्यालय नहीं आते थे और कुछ बच्चे आते भी थे तो पढ़ाई के प्रति सचेत नहीं रहते थे।


 जब परीक्षा का समय आता था तब वह काफी परेशान हो जाते थे और ठीक से पढ़ नहीं पाते थे परंतु सीसीई पैटर्न के लागू होने से बच्चे निर्भय होकर शिक्षा ग्रहण करने लगे हैं।


सीसीई पैटर्न को लाने से बच्चे पढ़ाई के प्रति काफी सचेत हुए हैं और यह बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने में काफी योगदान दिया। 


इसका उद्देश्य (Learning without burden)/ शिक्षा बिना बोझ के अर्थात इस प्रक्रिया में बच्चे का आकलन प्रतिदिन करना है जिससे बच्चे अपने पढ़ाई के प्रति ईमानदार रहेंगे और परीक्षा के समय भय से मुक्त रहेंगे।


और व्यापक का अर्थ है विद्यालय में बच्चों के सर्वांगीण विकास हेतु शैक्षिक और सह-शैक्षिक दोनों पक्षों को शामिल करके मूल्यांकन करना है। 


शैक्षिक का अर्थ है शिक्षा अधिगम प्रक्रिया के दौरान बच्चों का मूल्यांकन करना।


और सह शैक्षिक का अर्थ है शैक्षिक कार्यक्रम को छोड़कर विद्यालय के सभी पक्षों को शामिल करके उसका भी मूल्यांकन करना।


सह शैक्षिक के अंतर्गत नृत्य, गायन, परिभ्रमण, एनसीसी, प्रार्थना सभा, खेलकूद इत्यादि आता है।

अतः शिक्षक को बच्चों के सर्वांगीण विकास हेतु शैक्षिक और सह शैक्षिक दोनों पक्षों का मूल्यांकन करना आवश्यक है।


प्राचीन काल में बच्चों का केवल शैक्षिक मूल्यांकन किया जाता था और हम सभी व्यक्तिगत विभिन्नता / Individual difference से तो अच्छी तरह परिचित है यानी कि कोई भी दो बच्चे एक जैसे नहीं हो सकते।


उनमें कुछ ना कुछ विभिन्नताएं तो होती ही हैं। यहां तक कि दो जुड़वा बच्चे में भी कुछ समानताएं और कुछ असमानताएं होती है।


 इसका तात्पर्य कक्षा में सभी बच्चे पढ़ने में तेज नहीं होते हैं। कुछ प्रतिभाशाली बालक या बालिका होते हैं तो कुछ औसत तो कुछ निम्न इत्यादि।


 ऐसा कदापि जरूरी नहीं है कि जो बच्चे अच्छा पढ़ नहीं सकते वह कभी किसी और क्षेत्र में अच्छा नहीं कर सकते हैं।


 बच्चे दूसरे क्षेत्र में अपना बेहतर प्रदर्शन दे सकते हैं जैसे कक्षा में राधा नाम की बालिका जो पढ़ाई में अच्छी नहीं है परंतु हो सकता है कि वह नृत्य / गायन अथवा खेलकूद के क्षेत्र में अव्वल आती हो। 


इसलिए सीसीई पैटर्न में शिक्षा के दोनों पक्षों को शामिल किया गया है ताकि बच्चों में छिपी प्रतिभा को निखार सके और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर सकेे।


मूल्यांकन का अर्थ है मूल्यों का अंकन करना। यानी कि उनकी प्रतिभा को देखकर सभी पक्षों को ध्यान में रखते हुए अंकन करना। 


सतत और व्यापक मूल्यांकन के लाभ

👉 सतत और व्यापक मूल्यांकन बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

 👉इस पैटर्न बच्चों को भयमुक्त शिक्षा प्रदान करता है। इसके द्वारा बच्चे बिना बोझ के शिक्षा ग्रहण करते हैं। 

 👉 सीसीई के मदद से शिक्षक अपने बच्चों के कमजोरियों का पता लगा सकते हैं।

 👉 सतत और व्यापक मूल्यांकन के द्वारा शिक्षक प्रत्येक भिन्न भिन्न विद्यार्थियों की प्रतिभा, उनकी आवश्यकताओं को जान सकते हैं और उपचारात्मक शिक्षण दे सकते हैं।

👉 इससे बच्चों को भविष्य में किस क्षेत्र में जाना है यह जानने में सहायता मिलती है। 


दोस्तों, यह प्रश्न d.el.ed परीक्षा session 2018-2020 के प्रशिक्षुओं से पूछा गया था। और विगत वर्षो में b.ed परीक्षा में भी कई बार यह प्रश्न पूछा गया है। इसे पढ़ कर आप CTET के विगत वर्षो के प्रश्न हल कर सकते हैं। इससे आपको काफी मदद मिलेगी।


तो दोस्तों, आज के पोस्ट में मैंने आपको सतत और व्यापक मूल्यांकन के बारे में बताया। मुझे उम्मीद है कि आपको यह पोस्ट पसंद आया होगा। अगर आपको इस पोस्ट से जानकारी मिली हो तो आप अपने दोस्तो के बीच जरूर शेयर करें।

धन्यवाद🙏।




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