Shiksha ke vibhinn prakar

  हैलो दोस्तों, स्वागत है आप सभी का हमारे वेबसाइट Rasoteach में। आज की पोस्ट में मैं आपको शिक्षा के प्रकारों को बताने वाली हूं।


शिक्षा के प्रकारों को जाने से पहले हम यह जानेंगे कि सर्वप्रथम शिक्षा क्या है?

Shikha kya hai?

शिक्षा एक स्वाभाविक प्रक्रिया है जो जन्म से लेकर मृत्यु पर्यंत तक चलती रहती है। शिक्षा एक व्यक्ति को सरलता से अपने जीवन की समस्याओं को सुलझाने में सहायता करती है शिक्षा जितनी उच्च होगी, उतनी ही शीघ्रता सेवा अपने जीवन के कठिन समस्याओं को सुलझा सकेगा।


Shiksha ke vibhinn prakar


भारतीय भाषा के संदर्भ में शिक्षा का शाब्दिक अर्थ है :-शिक्षा शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के शिक्ष धातु से हुई है जिसका अर्थ सीखना तथा ज्ञान प्राप्त करना या अध्य्ययन  करना है।


शिक्षा के अनुरूप या सामान्य अर्थ वाला एक और विद्या है जो संस्कृत के विद्रोह धातु से बना है जिसका अर्थ है जानना।

अंग्रेजी भाषा में शिक्षा को एजुकेशन कहते हैं। Education शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के Educare से हुई है जिसका अर्थ है पालन पोषण करना, संवर्धन करना। 


शिक्षा के विभिन्न प्रकारों का वर्णन करें


शिक्षा जन्म से मृत्यु तक चलने वाली प्रक्रिया है। शिक्षा को तीन रूपो में ग्रहण किया जाता है:-

1. औपचारिक


2. अनौपचारिक तथा 


3. निरौपचारिक 


 यह एक व्यापक संप्रत्य है जिसमें विभिन्न स्रोतों जैसे- रेडियो, समाचार पत्र, टेलीविजन, शिक्षा संस्थानों आदि से प्राप्त ज्ञान को सम्मिलित किया जाता है। 

एक सामान्य व्यक्ति इसे शिक्षा संस्थाओं में प्राप्त शिक्षा के रूप में ही समझता है जो निश्चित रूप से अन्य स्रोतों से प्राप्त शिक्षा से सर्वथा भिन्न है।


 शिक्षा शास्त्रियों ने शिक्षा के विभिन्न प्रकारों का वर्णन किया है:-


 1. सामान्य शिक्षा ( General Education) :-  


जैसा कि मानवीय व्यवहार घोषणा में यह वर्णन किया गया है कि शिक्षा का प्रमुख कार्य माध्यमिक स्तर तक  बालक को सामान्य शिक्षा प्रदान करना है और यही हम शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य मानते हैं।


यह शिक्षा का निम्नतम स्तर है जो प्रत्येक व्यक्ति के लिए अपनी विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए आवश्यक होता है। 


यह बालको को उचित व्यवहार करने के योग्य बनाती है।इसका उद्देश्य बालक की सामान्य योग्यताओं का विकास करना है ताकि उसके व्यक्तित्व का विकास हो सके तथा वातावरण में समायोजन के योग्य बन सके।



 भारत में स्वतंत्रता के बाद सर्व शिक्षा को मुक्त तथा आवश्यक बना दिया गया है।


2. विशिष्ट शिक्षा ( Specific education) :-


 वर्तमान युग विशिष्टीकरण का युग है। एक व्यक्ति सभी क्षेत्रों में विशिष्ट नहीं हो सकता है। यदि मानव को उसके जन्मजात गुणों, योग्यताओं तथा क्षमताओं के अनुरूप विशिष्ट शिक्षा प्रदान की जाए तो उसे अपनी योग्यताओं के विकास के लिए उत्तम अवसर प्राप्त होंगे।




 इसका उद्देश्य एक व्यक्ति को किसी एक विशेष कौशल में कुशल बनाना है। यह समाज के प्रत्येक क्षेत्र में विशिष्ट प्रशिक्षित व्यक्ति प्रदान करती है। इस प्रकार यह राष्ट्र के विकास के साथ-साथ कल्याण में भी सहायक होती है।


 यह बहुत दीर्घ अवधि से चली आ रही है तथा विशिष्ट संस्थाओं में जैसे मेडिकल महाविद्यालय, इंजीनियरिंग महाविद्यालय, तकनीकी संस्थानों, प्रबंधन संस्थानों, कंप्यूटर शिक्षा प्रदान की जाती है।


3. प्रत्यक्ष शिक्षा ( Direct Education) :- 


 इस प्रकार की शिक्षा में शिक्षा तथा शिक्षार्थी में प्रत्यक्ष संबंध होता है। शिक्षा के व्यक्तित्व और चरित्र का प्रत्यक्ष प्रभाव विद्यार्थी पड़ता है।

 जहां विद्यार्थियों की संख्या बहुत अधिक होती है वहां शिक्षा संभव नहीं हो पाता क्योंकि ऐसी शिक्षा में अध्यापक के लिए प्रत्येक विद्यार्थी के साथ मधुर संबंध बनाए रखना कठिन हो जाता है।


 यही कारण है कि आज के समय कक्षा के आकार को छोटा बनाए रखने पर बल दिया गया है। राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2005 के अनुसार शिक्षक और बच्चों का अनुपात 1 :30 है।


4. अप्रत्यक्ष शिक्षा ( Indirect Education) :- 


वर्तमान युग में अप्रत्यक्ष शिक्षा अस्तित्व में आई क्योंकि जनसंचार के विकास के कारण मान शिक्षाशास्त्रियों के विचारों को उन लोगों तक पहुंचाना संभव हो गया है जो इन लोगों के प्रत्यक्ष संबंध से कभी नहीं आए।


 इंदिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय पूरे विश्व में विभिन्न क्षेत्रों में अप्रत्यक्ष शिक्षा प्रदान कर रहा है। बहुत से अन्य विश्वविद्यालय दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रम चला रहे हैं।



 उच्च  स्तर पर रेडियो, टेलीविजन आदि शिक्षण के लिए अधिक प्रसिद्ध हो रहे हैं। आज के समय में कोई भी व्यक्ति यदि इंटरनेट की सहायता से सूचना भी प्राप्त करना चाहता है तो वह आसानी से कर सकता है। इस प्रकार की शिक्षा पश्चिम से अधिक प्रसिद्ध होती जा रही है।


5. व्यक्तिगत शिक्षा (Individual Education) :-  


मनोवैज्ञानिक रूप से यह सिद्ध हो चुका है कि सभी व्यक्ति विभिन्न होते हैं इसलिए इस बात पर बल दिया जा रहा है कि शिक्षक को व्यक्तिगत रूप से प्रत्येक बालक का ध्यान रखना चाहिए।


 रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा शांतिनिकेतन में किया गया प्रयोग सफल सिद्ध हुआ परंतु यदि इस बड़े पैमाने पर शिक्षण विधि के रूप में अपनाया जाए तो यह पूर्ण रूप से व्यावहारिक होगी।


 प्राथमिक स्तर पर किंडर गार्डन, मांटेसरी पद्धति बच्चों पर व्यक्तिगत रुप से ध्यान देने की उच्च पद्धतियां है। 


6. सामूहिक शिक्षा ( Collective Education) :-


 जैसा कि नाम से ही पता चलता है, यह शिक्षा एक स्थान पर सामूहिक रूप से इकट्ठे हुए व्यक्तियों को दी जाने वाली शिक्षा है। एक अध्यापक जब एक ही समय पर बहुत बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को शिक्षा देता है तो ऐसी शिक्षा समय तथा धन के क्षेत्र में लाभदायक बन जाती है।


 भारत की जनसंख्या जिस गति से बढ़ती जा रही है तो यही शिक्षा उपयुक्त मानी जाती है।


7. चेतन शिक्षा ( Conscious Education) :- 


 यह ऐसी शिक्षा है जो उन उद्देश्यों को पूर्ण ज्ञान सहित, जिन्हें इसके द्वारा प्राप्त करना है, प्रदान की जाती है। इसका आयोजन बालक के माता-पिता तथा राज्य द्वारा किया जाता है।


8. अचेतन शिक्षा ( Unconscious Education) :- 


प्रत्येक बालक चेतन रूप से सभी प्रकार की शिक्षा ग्रहण नहीं कर सकता। बहुत से तथ्य जिनके बारे में बालक शिक्षा प्राप्त करता है वह उसके प्राकृतिक तथा सामाजिक वातावरण में और अचेतन मन में चली जाती है और और चेतन शिक्षा का रूप धारण कर लेती है।


9. संकुचित शिक्षा ( Narrow Education) :-


 यह विद्यालय तथा विश्वविद्यालय शिक्षा तक सीमित है। जब बालक शिक्षा संस्था में प्रवेश लेता है तब से प्रारंभ होती है तथा शिक्षा संस्था छोड़ने पर समाप्त हो जाती है।

 यह आकस्मिक न होकर नियोजित होती है। इसमें अध्यापक तथा विद्यार्थी में प्रत्यक्ष संबंध होता है।


10. विस्तृत शिक्षा ( Wider Education) :- 


यह एक जीवनपर्यंत चलने वाली शिक्षा है। यह जन्म से प्रारंभ होकर जीवन भर तक चलती रहती है। इसमें शिक्षा के सभी अभिकरणों - जैसे औपचारिक, अनौपचारिक और निरौपचारिक रूप से प्राप्त अनुभव सम्मिलित होते हैं।


 समाज का प्रत्येक सदस्य एक समय में अध्यापक के रूप में तथा दूसरे समय में विद्यार्थी के रूप में कार्य करता है। 


11. औपचारिक शिक्षा ( Formal Education) :- 


औपचारिक शिक्षा वह शिक्षा है जो कुछ निश्चित उद्देश्यों तथा आदर्शों के अनुरूप संगठित होती है। 

यह एक विशेष समय अवधि के लिए, विशेष समय पर, निश्चित पाठ्यक्रम के अनुसार बालक को औपचारिक ढंग से प्रदान की जाती है।


 शिक्षा देने का कार्य विशेष क्षेत्र में विशेष व्यक्तियों को प्रदान किया जाता है। इस क्षेत्र में बालक को सामान्य, विशिष्ट तथा प्रत्येक शिक्षा प्रदान की जाती है। यह अनुदेशन के अनुरूप है जो विद्यार्थी शिक्षा की औपचारिक संस्थाओं में प्राप्त करता है।


 शिक्षा क्रमबद्ध रूप से प्रदान की जाती है। इस प्रकार की शिक्षा समाज तथा व्यक्ति की आवश्यकता को पूरा करने के लिए प्रदान की जाती है। 


 यह विद्यार्थियों में उचित ज्ञान तथा कौशलों का विकास करती है तथा साथ ही साथ चरित्र निर्माण में भी सहायता कर दिया जिसे आज के विद्यार्थी कल के लिए उपयोगी नागरिक बन सकें।


जैसा कि कहा जाता है यह विद्यालय तक ही सीमित नहीं है।इसमें अध्यापक द्वारा प्रदान की जाने वाली विभिन्न प्रकार की व्यवसायिक शिक्षा भी शामिल है।

 जैसे- स्कूल, महाविद्यालय इत्यादि औपचारिक शिक्षा का ही उदाहरण है। 


12. अनौपचारिक शिक्षा ( informal education):- 


यह औपचारिक शिक्षा की पूरक है जिसके बिना औपचारिक शिक्षा अपूर्ण है। यह प्राकृतिक तथा आकस्मिक होती है।


 इसके परिणामस्वरूप बिना सोचे समझे प्रयास के व्यवहार में अचानक तथा आवश्यक रूप से परिवर्तन आता है। यह एक जीवनपर्यंत चलने वाली प्रक्रिया है।

 सभी अनौपचारिक शिक्षा प्राप्त करने के योग्य है। इसके लिए कोई निश्चित आयु नहीं होता। इसमें स्थान तथा समय निश्चित नहीं होता। 


इस प्रकार की शिक्षा में कोई उद्देश्य नहीं होते। अनुभवों से सीखता है तथा इसके द्वारा प्राप्त ज्ञान औपचारिक शिक्षा की अपेक्षा अधिक स्थायी रहता है। अनौपचारिक शिक्षा जीवन के प्रारंभिक समय में अधिक प्रभावी होती है क्योंकि इस काल में मस्तिष्क अधिक लचीला होता है।

 इसके चलाने के लिए वित्तीय साधनों की आवश्यकता नहीं होती है।  सफल पारिवारिक तथा सामुदायिक जीवन के लिए इसकी आवश्यकता होती है क्योंकि अनौपचारिक शिक्षा का उद्देश्य बालक का व्यापक तथा व्यवहारिक विकास करना है।


 इसके मापन का स्तर निश्चित नहीं है। यह प्राप्तकर्ता को कोई सर्टिफिकेट प्रदान नहीं करता। अनौपचारिक शिक्षा एक धीमी प्रक्रिया है तथा सामान्य शिक्षा प्रदान करती है। 


तो दोस्तों, आज के पोस्ट में मैंने आपको शिक्षा क्या है और शिक्षा के प्रकारों के बारे में बताया। अगर आपके मन में इस पोस्टर से संबंधित कोई भी प्रश्न हो तो बेझिझक कमेंट करके पूछ सकते हैं।

धन्यवाद।


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