Chhattisgarh tourist places in hindi

Chhattisgarh tourist places in hindi


 प्रकृति प्रेमियों का स्वर्ग है छत्तीसगढ़



21वीं शताब्दी में अस्तित्व में आने वाला भारत का पहला राज्य छत्तीसगढ़ कई मायनो में अनूठा है। विभिन्न रंगों से सराबोर इस राज्य में जनजातीय संस्कृति के रंग पग - पग पर तो बिखरे ही है, वन्यजीवन से भी यह राज्य बहुत समृद्ध है।


Chhattisgarh tourist places in hindi




भगवान राम ने अपने वनवास का काफी समय दंडकारण्य में गुजारा था। वर्तमान भारत के छत्तीसगढ़ उड़ीसा और आंध्र प्रदेश राज्य के हिस्से में दंडकारण्य में आते हैं।


 बहरहाल, अक्टूबर के पहले हफ्ते में, जब गर्मी विदा हो चुकी थी, हम सपरिवार छत्तीसगढ़ भ्रमण के लिए चूक कर गए। हम ट्रेन से रायपुर पहुंचे और एक ठीक-ठाक से होटल में पहुंच गए जो हमने ऑनलाइन ही बुक करा लिया था।


 भोरमदेव मंदिर 


सबसे पहले हम पहुंचे भोरमदेव मंदिर परिसर। छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में स्थित भोरमदेव मंदिर समूह राजधानी रायपुर से करीब 135 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।


 पत्थरों से बने नागर शैली के इस मंदिर को 'छत्तीसगढ़ का खजुराहो' भी कहा जाता है।  इसका स्थापत्य खजुराहो और कोणार्क के सूर्य मंदिर से मिलता-जुलता है।


सातवीं से 11वीं शताब्दी के बीच बनाया मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। यहां की शिवलिंग की सुंदरता देखते ही बनती है। मैकल पर्वत श्रेणी की हरी-भरी घाटियों में स्थित इस मंदिर में आकर मन अपूर्व शांति और संतुष्टि से भर जाता है।


कैलाश व कोटमसर गुफाएं


जगदलपुर से लगभग 40 किलोमीटर दूर तीरथगढ़ जलप्रपात के पास घने जंगलों में स्थित लाखों साल पुरानी ये गुफाएं स्टैलेक्टाइट्स ( छत से नीचे की ओर लड़के चूना पत्थर के खंभे) व स्टेलेग्माइट्स ( जमीन से ऊपर की ओर उठने वाले स्तंभ) की अदभुत संरचनाएं है। 


गाइड ने बताया कि स्टैलेक्टाइट्स और स्टेलेग्माइट्स बूंद - बूंद जमा होकर बनते हैं। और 1 इंच को बनने में लगभग 6000 साल लगते हैं। यह गुफाएं पश्चिम आस्ट्रेलिया के "क्रिस्टल केव्स" की याद दिलाती है।


यह पारी में 200 मीटर लंबी, 35 मीटर चौड़ी और 55 मीटर गहरी है। कुछ स्टेलेग्माइट्स के निशान है, जिनसे पता चलता है कि उनकी पूजा शिव लिंगम के रूप में की जाती रही है।


 यहां होने वाली गूंज अजीब तरह से संगीतमय होती है। जगदलपुर से करीब 38 किलोमीटर दूर कोटा में सर गुफाएं की भी ऐसी ही संरचना है। 


रायपुर से इनकी दूरी 330 किलोमीटर के आसपास है। इन गुफाओं को देखना एक अविस्मरणीय अनुभव से गुजरना है। है इनके अलावा भी राज्य में कई गुफाएं हैं।


बस्तर पैलेस


बस्तर रॉयल पैलेस एक आर्किटेक्चर का एक बेहतरीन नमूना है। बस्तर के राजाओं ने जब अपनी राजधानी को जगदलपुर स्थानांतरित किया था, तब इस महल का निर्माण कराया था। राज्य सरकार ने इस महल के इतिहास व विरासत को संरक्षित करने के उद्देश्य से एक छोटा सा संग्रहालय बनवाया है, जिसमें बस्तर के शासकों की कलाकृतियों और चित्रों को प्रदर्शित किया गया है। 


इसका सादगी भरा सौंदर्य बरबस ही अपनी ओर खींच लेता है।


चित्रकोट जलप्रपात


जगदलपुर से 38 किलोमीटर दूर इंद्रावती नदी पर स्थित चित्रकोट जलप्रपात को देखते ही मन गा उठता है - 'दिल कहे रुक जा रे रुक जा, यहीं पर कहीं / जो बात इस जगह में, है कहीं पर नहीं '


छत्तीसगढ़ के इस नायाब प्राकृतिक झरने को 'मिनी नियाग्रा' भी कहा जाता है। यह भारत का सबसे बड़ा जलप्रपात है। 


नदी का पानी लगभग 95 फीट की ऊंचाई से जब जल नीचे गिरता है तो दृश्य और ध्वनि मदहोश कर देते हैं। 


घोड़े का नाल की आकार वाले इस झरने का सौंदर्य जुलाई से अक्टूबर के बीच अपने चरम पर होता है।


यह जगदलपुर से करीब 40 किलोमीटर दूर है।


तीरथगढ़ जलप्रपात में देश भर में प्रसिद्ध है। बस्तर जाने वाले पर्यटक भी देशभर में जरूर जाते हैं। चित्रकोट से यह करीब 57 किलोमीटर दूर है। यहां दो नदियों का संगम भी है। मुनगा और बहार नदियां यहां आपस में मिलती है।


वन्य जीवन का दर्शन


छत्तीसगढ़ के कुल क्षेत्रफल का 44% भाग वन क्षेत्र है जो भारत में सबसे ज्यादा है। छत्तीसगढ़ सबसे लोग लुप्तप्राय व दुर्लभ वन्यजीवों जैसे जंगली भैंसा और पहाड़ी मैना का आश्रय स्थल है। 


राज्य में 2 राष्ट्रीय उद्यान, 3 बाघ अभ्यारण, 8 वन्यजीव अभयारण्य, और एक जैव आरक्षित क्षेत्र है।

कांगेर घाटी

 यहां का कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान प्राकृतिक सौंदर्य का खजाना है। पहाड़ों के नजारे, गहरी घाटियां, वृक्ष और मौसमी जंगली फूल मुग्ध कर देते हैं। 


कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान अपनी प्रकृतिक गोद में वन्यजीवों को देखने का दुर्लभ अवसर प्रदान करता है।



सिरपुर का बौद्ध विहार


सिरपुर एक छोटा सा शहर है जो रायपुर से करीब 85 किलोमीटर दूर है। सिरपुर में स्थित बुद्ध विहार नालंदा से भी पुराने हैं। ये बौद्ध विहार पांचवी से आठवीं शताब्दी का है।


छत्तीसगढ़ में देखने महसूस करने के लिए ढेरों धार्मिक सांस्कृतिक ऐतिहासिक व लोक से जुड़ी विरासते हैं। 


सबको एक बार में देख पाना असंभव है। फिर भी जहां तक संभव हो वहां के सौंदर्य का दीदार करने की कोशिश करें।



छत्तीसगढ़ का कला और शिल्प


छत्तीसगढ़ का 'वुड क्राफ्ट' बहुत प्रसिद्ध है। रायगढ़ व सरगुजा जिलों में आदमकद प्रतिमाएं काफी प्रचलित है।


 छत्तीसगढ़ में बांस काफी पाया जाता है। 

आप यहां से बांस के बने सामान व कलाकृतियों जैसे कि टेबल, मैट, बास्केट, वॉल हैंगिंग, टेबल लैंप आदि खरीद सकते हैं। 



यहां की पेंटिंग भी अनूठी होती है।


 इन में जनजातीय जीवन व संस्कृति चित्रण होता है। यह कला जनजातीय समुदाय में बच्चे के जन्म से विवाह तक हर मौके का जरूरी हिस्सा है। 


छत्तीसगढ़ का कोसा (टसर) सिल्क भी बेहतरीन है। रेशम की बुनाई यहां का प्रमुख हथकरघा उद्योग है।


छत्तीसगढ़ कब और कैसे जाएं?

यहां जाने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से फरवरी मार्च तक का है।


 छत्तीसगढ़ वायु मार्ग, सड़क मार्ग और रेल मार्ग तीनों तरीके से पहुंच सकते हैं। 


नए और पुराने रायपुर के बीच स्थित स्वामी विवेकानंद हवाई अड्डा दिल्ली, मुंबई, नागपुर, भुवनेश्वर, कोलकाता, रांची, विशाखापट्टनम और चेन्नई से जुड़ा हुआ है।


 छत्तीसगढ़ में रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़, भाटापारा सहित कई रेलवे स्टेशन है जो देश के विभिन्न शहरों से जुड़े हैं। छत्तीसगढ़ सड़क मार्ग द्वारा भी देश के दूसरे भागों से अच्छी तरह जुड़ा है।


 ऐतिहासिक स्थलों प्राचीन मंदिरों, सुंदर झरनों विस्मित कर देने वाली गुफाओं और अभयारण्य से संबंधित छत्तीसगढ़ में सब कुछ है जो बतौर सैलानी आप देखना चाहते हैं। यहां प्रकृति लोक संस्कृति आध्यात्मिक इतिहास का अनूठा संगम है। 

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